मुख्यमंत्री से मुलाकात तक एक इंच भी आगे बढ़ा तो भड़केगा विरोध—जबरन कार्रवाई हुई तो प्रशासन और प्रबंधन जिम्मेदार
दुर्गापुर सहित प्रभावित गांवों के किसानों ने SDM को सौंपा ज्ञापन, बोले—बिना सहमति सर्वे और भूमि अधिग्रहण किसी कीमत पर मंजूर नहीं
धरमजयगढ़/रायगढ़:— प्रस्तावित SECL ओपन कोल ब्लॉक को लेकर धरमजयगढ़ क्षेत्र में किसानों का विरोध एक बार फिर उग्र तेवर में सामने आया है। ग्राम पंचायत दुर्गापुर सहित परियोजना से प्रभावित किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धरमजयगढ़ को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में मांग रखी है कि जब तक प्रभावित किसानों की बैठक और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात नहीं हो जाती, तब तक SECL द्वारा प्रस्तावित परियोजना से संबंधित किसी भी प्रकार का सर्वे, निरीक्षण या अन्य गतिविधि तत्काल रोक दी जाए।
किसानों ने साफ कर दिया है कि उनकी सहमति के बिना न सर्वे स्वीकार होगा और न ही भूमि अधिग्रहण। किसानों के मुताबिक, 19 जुलाई 2026 को ग्राम अंबेटिकरा मंदिर में SECL के महाप्रबंधक और अधिकारियों के साथ प्रभावित किसानों व जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रस्तावित ओपन कोल खदान का विरोध किया था।
किसानों का दावा है कि बैठक के दौरान SECL के महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया था कि ग्रामीणों की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का सर्वे या अन्य गतिविधि नहीं कराई जाएगी। लेकिन अब SECL द्वारा दोबारा सर्वे की तैयारी किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद प्रभावित गांवों में आक्रोश भड़क उठा है।
“पहले मुख्यमंत्री से चर्चा, फिर कोई फैसला”—किसानों का स्पष्ट रुख
प्रभावित किसानों ने बताया कि विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों की एक समिति गठित कर जल्द ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी आपत्तियों, समस्याओं और किसानों की चिंताओं को लिखित रूप में रखेगा।
किसानों का कहना है कि यह खेती-किसानी का समय है और ग्रामीण अपने कृषि कार्यों में व्यस्त हैं। ऐसे समय में सर्वे या अन्य गतिविधियां शुरू करना क्षेत्र में अनावश्यक तनाव और विवाद को जन्म दे सकता है।
जबरन सर्वे हुआ तो अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी SECL और प्रशासन की : किसान
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्यमंत्री से चर्चा होने तक परियोजना से संबंधित सभी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि इसके बावजूद SECL द्वारा जबरन सर्वे या अन्य कार्रवाई की जाती है और क्षेत्र में कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और प्रशासन की होगी।
प्रस्तावित SECL ओपन कोल ब्लॉक को लेकर किसानों और SECL के बीच बढ़ता टकराव अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। किसानों के अल्टीमेटम के बाद अब प्रशासन और SECL प्रबंधन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिक गई हैं।

SECL के सर्वे पर किसानों का ‘अल्टीमेटम’!">








