
500 से अधिक पुस्तकों से सजा निःशुल्क पुस्तकालय, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए खुला
रतनपुर… विकासखंड कोटा के ग्रामीण विद्यालयों में पदस्थ राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक दंपति बलदाऊ सिंह श्याम एवं पार्वती श्याम ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के “सबके लिए गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा” के संकल्प को साकार करने की दिशा में अनूठी पहल की है। उन्होंने अपने स्कूली बच्चों के साथ-साथ अपने गृह ग्राम फुलवारी पारा में ग्रामीण समुदाय के लिए एक निःशुल्क पुस्तकालय की शुरुआत की है।
शिक्षक दंपति का मानना है कि शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक बच्चे, युवा और नागरिक को पढ़ने तथा सीखने के समान अवसर मिलें, इसी उद्देश्य से फुलवारी पारा में पुस्तकालय की नींव रखी गई।
जन्माष्टमी पर हुआ पुस्तकालय का शुभारंभ
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ग्रामीण विद्यार्थियों को अध्ययन एवं ज्ञान के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस निःशुल्क पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया। ग्राम पंचायत शिवपुर-फुलवारी पारा की सरपंच ललिता कंवर, उनके पति चुन्नीलाल कंवर, कोटवार राधेदास एवं अन्य ग्रामीण जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों की उपस्थिति में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना, आरती एवं दीप प्रज्वलन के बाद फीता काटकर पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया।
500 से अधिक पुस्तकों का संग्रह
शिक्षक बलदाऊ सिंह श्याम ने बताया कि पुस्तकालय में गांव के छोटे बच्चों से लेकर युवाओं, विद्यार्थियों और बुजुर्गों की रुचि एवं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विषयों की पुस्तकें संग्रहित की गई हैं। यहां 500 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है।
पुस्तकालय में रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, भागवत जैसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक साहित्य के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, हिंदी साहित्य, स्थानीय भाषाओं के साहित्य, प्रेरणादायक बाल साहित्य तथा विभिन्न स्तर के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी पुस्तकें शामिल की गई हैं।
विशेष रूप से शिक्षक दंपति द्वारा स्वयं लिखित एवं प्रकाशित पुस्तकों को भी पुस्तकालय में स्थान दिया गया है, ताकि बच्चों को स्थानीय परिवेश, भाषा और जीवन-मूल्यों से जुड़ा प्रेरणादायक साहित्य पढ़ने का अवसर मिल सके।
पढ़ने की संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
शिक्षक दंपति का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयीन पुस्तकालयों की स्थापना से केवल विद्यार्थियों को ही नहीं, बल्कि पूरे समुदाय को लाभ मिलता है। विद्यालयीन समय के बाद भी बच्चे, युवा और अन्य ग्रामीण पुस्तकालय का उपयोग कर सकते हैं। इससे गांव में पठन संस्कृति, स्वाध्याय और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुसार पुस्तकालय का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए एक अलग कमरे का निर्माण करने की भी योजना है, ताकि बच्चे शांत एवं अनुकूल वातावरण में बैठकर नियमित रूप से अध्ययन कर सकें।
शिक्षा को गांव तक पहुंचाने का संकल्प
शिक्षक दंपति की यह पहल इस विचार को मजबूत करती है कि शिक्षा का प्रकाश केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर पूरे समुदाय तक पहुंचना चाहिए। फुलवारी पारा का यह पुस्तकालय ग्रामीण बच्चों के लिए ज्ञान, कल्पना, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का नया केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


शिक्षक दंपति की पहल से फुलवारी पारा गाँव को मिली पुस्तकालय की सौगात">






