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गुड़ी में तीन दिवसीय श्रीरामचरित मानस सम्मेलन का समापन, रामभक्ति में डूबे श्रद्धालु

समय न्यूज़ लाइव प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट
समय न्यूज़ लाइव प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट

सीपत :– एनटीपीसी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गुड़ी में मानस प्रचार-प्रसार समिति के तत्वावधान में पिछले 18 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे तीन दिवसीय श्रीरामचरित मानस सम्मेलन एवं रामकथा का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच समापन हुआ। तीन दिनों तक रामनाम की गूंज और मानस की चौपाइयों से गुड़ी का वातावरण भक्तिमय बना रहा। कथा श्रवण के लिए दूर-दराज के गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। समापन दिवस पर मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया भी कथा श्रवण करने पहुंचे। सम्मेलन में मानस मर्मज्ञों ने रामचरित मानस के प्रसंगों के माध्यम से धर्म, कर्तव्य, समर्पण, पारिवारिक एकता और आदर्श जीवन का संदेश दिया। बांदा, उत्तरप्रदेश से पहुंचे मानस रत्न पंडित रामगोपाल तिवारी ने हनुमान जी और प्रभु श्रीराम के प्रसंग के माध्यम से समर्पण एवं कर्तव्यनिष्ठा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि मैं तो आपका चलाया हुआ बाण हूं। इस भाव में पूर्ण समर्पण, विश्वास और अपने आराध्य के प्रति निष्ठा छिपी हुई है। हनुमान जी अपने प्रत्येक कार्य को प्रभु श्रीराम की इच्छा और कृपा से जुड़ा हुआ मानते हैं। मनुष्य को भी अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में प्रभु की कृपा का स्मरण करते रहना चाहिए। पं. तिवारी ने कहा कि धर्म का पालन करना प्रशंसनीय है, लेकिन धर्म के आदर्शों को अपने आचरण में उतारना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। रामचरित मानस केवल कथा सुनने का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। इसके प्रसंग हमें कर्तव्य निभाने, दूसरों की सहायता करने, विनम्र रहने और अपने जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे का समय निकालकर रामचरित मानस का पाठ अवश्य करें। केवल पाठ तक सीमित न रहें, बल्कि उसमें बताए गए आदर्शों को अपने व्यवहार और जीवन में भी अपनाएं। जब व्यक्ति रामचरित मानस की शिक्षाओं को अपने आचरण में उतारता है, तभी उसका वास्तविक लाभ प्राप्त होता है ।रामजी के पदचिह्नों पर चलकर इतिहास बदलें : पं. रुचि रामायणी , कथावाचिका पं. रुचि रामायणी ने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन के साथ समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है। रामचरित मानस के प्रत्येक पात्र का अपना विशिष्ट महत्व और जीवनोपयोगी संदेश है। इसलिए रामायण के पात्रों की भूमिका और उनके आचरण को समझना आवश्यक है। उनसे प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने कर्तव्यों और रिश्तों के प्रति जिम्मेदारी निभाना सीख सकता है। उन्होंने पारिवारिक संबंधों की महत्ता बताते हुए कहा कि भाई-भाई के बीच संपत्ति का बंटवारा हो सकता है, लेकिन विपत्ति का बंटवारा कभी नहीं होना चाहिए। सुख के समय साथ रहना आसान है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का सहारा बनना ही रिश्तों की वास्तविक पहचान है। परिवार में प्रेम, त्याग, सहयोग और विश्वास बना रहे, तो अनेक समस्याओं का समाधान आपसी समझ से किया जा सकता है। पं. रुचि रामायणी ने कहा कि रामचरित मानस की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी पहले थीं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में मर्यादा, त्याग, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा को स्थान दे, तो परिवार और समाज दोनों में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

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