
विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए 3R सिद्धांत अपनाने का दिया संदेश
उपका, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला एवं शासकीय प्राथमिक शाला उपका में ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक कचरा) प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शाला विकास समिति के सदस्यों तथा ग्राम की जागरूक महिलाओं ने सहभागिता करते हुए इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित निपटान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शाला विकास समिति (SMC) की अध्यक्ष जलेश्वरी ओट्टी ने की। इस अवसर पर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला उपका के प्रधान पाठक सूर्यकांत वाजपेयी एवं शासकीय प्राथमिक शाला उपका के प्रधान पाठक रामकुमार बैगा के नेतृत्व में विद्यालय के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की जानकारी देना तथा उसके उचित प्रबंधन के प्रति जिम्मेदार व्यवहार विकसित करना था।
ई-वेस्ट के दुष्प्रभावों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान पूर्व माध्यमिक शाला की शिक्षिका मीरा जगत, प्राथमिक शाला की शिक्षिका कुसुम बुनकर तथा विद्यालय के ऊर्जा माँ शिक्षक कृष्णा जगत ने विद्यार्थियों को ई-वेस्ट के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, चार्जर, बैटरी, खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य अनुपयोगी विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ ई-वेस्ट की श्रेणी में आती हैं।
उन्होंने समझाया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को उपयोग के बाद इधर-उधर फेंकना या सामान्य घरेलू कचरे के साथ मिलाकर जला देना पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे कचरे में मौजूद कुछ हानिकारक पदार्थ मिट्टी और जल को प्रदूषित कर सकते हैं। इसके कारण पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने के साथ-साथ जीव-जंतुओं और मनुष्यों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ई-वेस्ट का उचित प्रबंधन केवल शासन या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि समय रहते इसके सुरक्षित संग्रहण और निपटान के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो भविष्य में यह गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बन सकता है।
3R सिद्धांत अपनाने पर दिया जोर
कार्यक्रम में ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए 3R सिद्धांत—रिड्यूस (Reduce), रीयूज (Reuse) और रीसायकल (Recycle)—के महत्व को विस्तार से समझाया गया।
शिक्षकों ने बताया कि रिड्यूस का अर्थ अनावश्यक वस्तुओं की खरीद और उपयोग को कम करना, रीयूज का अर्थ उपयोगी वस्तुओं का सुरक्षित तरीके से दोबारा उपयोग करना तथा रीसायकल का अर्थ अनुपयोगी सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से पुनर्चक्रित करना है। इन सिद्धांतों को अपनाकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे की मात्रा कम की जा सकती है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है।
विद्यार्थियों को यह भी प्रेरित किया गया कि वे अपने घरों में खराब मोबाइल, बैटरी, चार्जर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुले स्थानों पर न फेंकें। ऐसे कचरे को अलग एकत्रित कर अधिकृत ई-वेस्ट संग्रहण केंद्र या निर्धारित निपटान व्यवस्था तक पहुँचाने के लिए परिवार के सदस्यों को जागरूक करें। इस प्रकार बच्चे अपने घर और समाज में पर्यावरण संरक्षण के संदेशवाहक बन सकते हैं।
ग्राम की महिलाओं ने भी निभाई सहभागिता
इस जागरूकता कार्यक्रम में ग्राम की महिलाओं की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही। श्रीमती रानी नेताम, श्रीमती रानी मरावी एवं रूपेश्वरी विश्वकर्मा सहित अन्य महिलाओं ने उपस्थित होकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समर्थन दिया। उनकी सहभागिता से यह संदेश सामने आया कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल विद्यालय तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि परिवार और पूरे समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में अनुसूइया का विशेष योगदान रहा। शिक्षकों एवं उपस्थित सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यालयों में आयोजित ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने ई-वेस्ट को सामान्य कचरे से अलग रखने, उसे सुरक्षित तरीके से एकत्रित करने तथा पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प लिया। साथ ही विद्यार्थियों को अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी ई-वेस्ट प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।
विद्यालय परिवार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की आदतें बचपन से विकसित की जानी चाहिए। जब विद्यार्थी स्वयं जिम्मेदारी समझेंगे और अपने परिवार एवं समाज को जागरूक करेंगे, तभी स्वच्छता और सुरक्षित पर्यावरण का संदेश व्यापक स्तर पर प्रभावी हो सकेगा।
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला एवं शासकीय प्राथमिक शाला उपका में आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा के साथ पर्यावरणीय चेतना को जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग, ई-वेस्ट का सुरक्षित निपटान और 3R सिद्धांतों का पालन करके प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

शासकीय पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक शाला उपका में ई-वेस्ट प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम संपन्न">







