
धोबघाट से खुलेआम निकल रहे रेत से भरे ट्रैक्टर, रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टरों की आवाजाही पर खनिज विभाग मौन… आखिर कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहे अधिकारी?
बेलगहना। क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। धोबघाट से रेत से भरे ट्रैक्टर दिनदहाड़े सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर अवैध रेत लेकर बेलगहना की ओर जाने वाले मार्ग से गुजर रहे हैं। इसके बावजूद खनिज विभाग की कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। आखिर विभाग की इस खामोशी के पीछे वजह क्या है?
स्थानीय स्तर पर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या खनिज विभाग के अधिकारियों को अवैध रेत कारोबार दिखाई नहीं दे रहा, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? त्योहारों का मौसम आते ही क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं— “अरे बाबू भाई! सब लिफाफे का खेल है, क्या दिवाली मनाने के लिए लिफाफों का इंतजार हो रहा है?”
हालांकि, लिफाफे के लेन-देन को लेकर उठ रही इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन विभाग की निष्क्रियता ने संदेह और सवालों को जरूर जन्म दे दिया है।
अवैध रेत परिवहन से हादसों का खतरा, आखिर किसकी जिम्मेदारी?
धोबघाट से निकलने वाले रेत से भरे ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही से सड़क पर चलने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। आए दिन हादसों की आशंका और दुर्घटनाओं की शिकायतों के बीच ग्रामीणों का सवाल है कि यदि किसी दिन किसी निर्दोष की जान चली गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
सवाल यह भी है कि क्या इन ट्रैक्टरों के पास रेत परिवहन की वैध अनुमति है? क्या खनिज विभाग ने कभी मौके पर पहुंचकर जांच की? यदि अवैध उत्खनन और परिवहन हो रहा है तो अब तक कितने वाहनों पर कार्रवाई की गई?
खनिज विभाग की चुप्पी पर उठते तीखे सवाल
– धोबघाट से प्रतिदिन निकलने वाले रेत से भरे ट्रैक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
– क्या विभाग को इस अवैध कारोबार की जानकारी नहीं है?
– क्या रेत परिवहन करने वाले सभी ट्रैक्टरों के पास वैध रॉयल्टी और दस्तावेज हैं?
– त्योहारों के समय अवैध कारोबार पर निगरानी और सख्त क्यों नहीं की जा रही?
– यदि किसी बड़े हादसे में किसी की जान जाती है तो जवाबदेही किस अधिकारी की होगी?
प्रशासन जागे, इससे पहले कि कोई बड़ी अनहोनी हो!
क्षेत्रवासियों की मांग है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग तत्काल धोबघाट पहुंचकर रेत उत्खनन एवं परिवहन की जांच करें। अवैध रूप से रेत का उत्खनन और परिवहन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित मार्ग से गुजरने वाले ट्रैक्टरों के पास वैध दस्तावेज हैं या नहीं।
आखिर कब तक अवैध रेत कारोबारियों की मनमानी चलती रहेगी? कब तक जिम्मेदार विभाग की चुप्पी आम जनता की सुरक्षा पर भारी पड़ती रहेगी?
दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन यदि इसी त्योहार की आड़ में अवैध कारोबार को संरक्षण मिलने की चर्चाएं उठ रही हैं, तो प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना ही होगा।
जनता का सीधा सवाल है— खनिज विभाग कार्रवाई करेगा या फिर अवैध रेत का कारोबार यूं ही लिफाफों की चर्चाओं के बीच चलता रहेगा?

अरे बाबू भाई! क्या लिफाफों के भरोसे चल रहा खनिज विभाग? दिवाली के नाम पर अवैध रेत कारोबारियों की बल्ले-बल्ले">







