Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

गांव की धड़कनों में बसता तिरंगा: बच्चों का पैर धोकर, चंदन-फूल से स्वागत – दशकों से चल रही अनूठी परंपरा

रतनपुर से रवि ठाकुर की रिपोर्ट
रतनपुर से रवि ठाकुर की रिपोर्ट

बिलासपुर/रतनपुर——-
सुबह का समय, आसमान में हल्की सुनहरी धूप फैली है। हवा में तिरंगे की खुशबू और ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज रही है। कोटा ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र के गांव खसरिया में आज का दिन किसी त्योहार से कम नहीं।

तिरंगा लिए छोटे-छोटे कदम जब गलियों में बढ़ते हैं, तो हर घर का आंगन मंदिर बन जाता है। महिलाएं थाल में दीप, चावल और फूल लिए खड़ी हैं, बुजुर्ग आशीर्वाद के लिए आगे बढ़ते हैं, और नन्हें देशभक्तों के पैर धोकर, माथे पर चंदन-टीका लगाकर उनका स्वागत करते हैं।


यह नजारा 15 अगस्त और 26 जनवरी को यहां का वर्षों पुराना सच है। चपोरा संकुल अंतर्गत खसरिया पारा की प्राथमिक शाला से निकली बच्चों की तिरंगा रैली आज भी उसी आत्मीयता और श्रद्धा के साथ पूरे गांव में घूमी, जैसे दशकों पहले होती थी।शिक्षिका ज्योति तम्बोली ने भावुक होकर बताया,

“हमारे यहां राष्ट्रीय पर्व के दिन घर-घर से लोग निकलकर बच्चों का स्वागत करते हैं। यह केवल सम्मान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में देशभक्ति का बीज बोने का तरीका है।”पूरे गांव में रैली के स्वागत का यह क्रम किसी एक घर पर नहीं रुकता। हर दरवाजे पर वही श्रद्धा, वही मुस्कान, वही तिरंगे के लिए उमंग। महिलाएं गीत गाती हैं, बुजुर्ग आशीर्वाद देते हैं और बच्चे, जिनके पैरों पर जल चढ़ाया जाता है, गर्व से आगे बढ़ते जाते हैं।


खसरिया ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों में भी यह परंपरा आज भी जीवित है। आधुनिकता की तेज रफ्तार में भी यह सांस्कृतिक धरोहर गांवों के दिल में गहराई तक बसी हुई है। यहां राष्ट्रीय पर्व सिर्फ एक सरकारी अवकाश नहीं, बल्कि एक सामूहिक उत्सव है, जिसमें हर कोई शामिल होता है।गांव के बुजुर्ग रामलाल गोड कहते हैं, “हमने अपने बचपन में भी यही देखा था, और आज हमारे पोते उसी सम्मान के साथ तिरंगा लेकर निकलते हैं। यह परंपरा हमारी पहचान है।”

गांव की धड़कनों में गूंजता है—–राजू मानिकपुरी

आज जब दुनिया में देशभक्ति कई बार केवल भाषणों में सिमट जाती है, खसरिया पारा और उसके आसपास के गांव यह साबित करते हैं कि सच्चा देशप्रेम जुलूसों और नारों से आगे, लोगों के दिल और कर्म में बसा होता है। यहां हर राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा सिर्फ लहरता नहीं, बल्कि पूरे गांव की धड़कनों में गूंजता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

और भी पढ़ें

📝 संपादक की जानकारी

संपादक: फिरोज खान

पता: बिलासपुर, छत्तीसगढ़ - 495001

संपर्क नंबर: 📞 98271 37773 📞 97131 37773 📞 98279 60889

ईमेल: firojrn591@gmail.com


वेबसाइट में प्रकाशित खबरों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है समाचार की विषयवस्तु संवाददाता के विवेक पर निर्भर यह एक हिंदी न्यूज़ वेबसाइट है, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश और दुनिया की खबरें प्रकाशित की जाती हैं। वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी समाचार से संबंधित कानूनी विवाद की स्थिति में केवल बिलासपुर न्यायालय की ही मान्यता होगी।

WhatsApp