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राजिम में अवैध रेत खनन का खेल बेखौफ, रातभर दौड़ रहे हाईवा

गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट
गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट

*गरियाबंद*:- जिले के राजिम क्षेत्र से लगे ग्राम पोखरा और चौबेबांधा में अवैध रेत खनन का कारोबार खुलेआम जारी है। बरसात के मौसम और खनन पर प्रतिबंध के बावजूद रेत माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिलने के कारण माफिया बेखौफ होकर महानदी का सीना छलनी कर रहे हैं। प्रतिदिन लगभग 150 से 200 हाईवा अवैध रूप से रेत भरकर रायपुर, महासमुंद सहित अन्य शहरों की ओर रवाना हो रहे हैं, जहां ऊंचे दामों पर इसकी बिक्री की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, दिन में गतिविधियां सीमित दिखाई देती हैं, लेकिन जैसे ही रात के 8 बजे होते हैं, दोनों घाटों पर अवैध खनन का खेल तेज हो जाता है। घाटों पर हाईवा वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और चैन माउंटेन मशीनों की मदद से नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जाती है। पूरी रात मशीनों और वाहनों की आवाजाही जारी रहती है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो यहां किसी वैध खदान का संचालन हो रहा हो।


ग्रामीणों का आरोप है कि पोखरा और चौबेबांधा घाटों से निकाली जा रही रेत सीधे रायपुर और महासमुंद भेजी जा रही है। रातभर दर्जनों हाईवा लगातार लोड होकर निकलते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है। इससे माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा कभी-कभार औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली जाती है, लेकिन कुछ ही समय बाद अवैध खनन फिर पहले की तरह शुरू हो जाता है। लगातार हो रहे इस अवैध उत्खनन से महानदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, नदी की जलधारा प्रभावित हो रही है और पर्यावरणीय संतुलन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि यदि प्रशासन वास्तव में सख्ती बरते तो रात के समय घाटों पर पहुंचकर बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन कार्रवाई के अभाव में रेत माफिया बेखौफ होकर शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि पोखरा और चौबेबांधा घाटों पर संयुक्त अभियान चलाकर चैन माउंटेन मशीनों, हाईवा वाहनों और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह भी पता लगाया जाए कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार लंबे समय से संचालित हो रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो महानदी के अस्तित्व और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

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