
कोटा-पटैता बैरियर पर ट्रैक्टर चालकों से फोनपे के जरिए 15 हजार और 5 हजार रुपये नकद वसूली का आरोप, तीन घंटे तक रोके रखा ट्रैक्टर
वन विभाग के छोटे कर्मचारियों के जरिए वसूली करवाने का आरोप, रेंजर नितिन लहरे की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
कोटा:—समय न्यूज़ लाइव में कल प्रकाशित खबर में कहा गया था कि अवैध रेत के कारोबार में सब कुछ पैसों का खेल है। लेकिन अब कोटा क्षेत्र से सामने आ रहे कथित वसूली के मामले ने इस पूरे खेल को एक नया मोड़ दे दिया है। यहां सवाल सिर्फ अवैध रेत परिवहन का नहीं, बल्कि कार्रवाई के नाम पर फोनपे और नकदी के जरिए कथित वसूली का भी उठ रहा है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि त्योहार आते ही अवैध रेत का कारोबार अचानक वैध जैसा नजर आने लगता है। वहीं अवैध रेत परिवहन रोकने के नाम पर ट्रैक्टर चालकों से पैसे लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
मामला कोटा-पटैता बैरियर का बताया जा रहा है। एक ट्रैक्टर चालक ने आरोप लगाया है कि उसके ट्रैक्टर को करीब तीन घंटे तक रोककर रखा गया। चालक के मुताबिक, रमेश कुमार साहू द्वारा पहली बार फोनपे के माध्यम से 10 हजार रुपये, दूसरी बार 5 हजार रुपये और इसके अलावा 5 हजार रुपये नकद लिए गए। चालक ने कुल 15 हजार रुपये फोनपे और 5 हजार रुपये नकद दिए जाने का आरोप लगाया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ट्रैक्टर अवैध रेत का परिवहन कर रहा था, तो नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर फोनपे और नकदी से लेन-देन क्यों किया गया? क्या इसकी कोई आधिकारिक रसीद दी गई? क्या ट्रैक्टर के खिलाफ विधिवत जब्ती या चालानी कार्रवाई की गई?
छोटे कर्मचारियों के जरिए वसूली का आरोप!
इस पूरे मामले में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वन विभाग के छोटे कर्मचारियों के माध्यम से ट्रैक्टर चालकों से पैसे की वसूली करवाई जाती है। यदि यह आरोप सही है, तो यह विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वहीं वन विभाग के रेंजर नितिन लहरे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
बाबू भाई, यहां मामला सिर्फ रेत का नहीं, फोनपे का कमाल भी दिखाई दे रहा है!
समय न्यूज़ लाइव की पिछली खबर में पैसों के खेल की बात सामने आई थी, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या अवैध रेत रोकने के नाम पर कोई समानांतर वसूली व्यवस्था चल रही है?
जवाब मांगते बड़े सवाल
1. क्या कोटा-पटैता बैरियर पर ट्रैक्टर चालकों से फोनपे के जरिए पैसे लिए गए?
2. 15 हजार रुपये फोनपे और 5 हजार रुपये नकद लेने के आरोपों की जांच कौन करेगा?
3. तीन घंटे तक ट्रैक्टर रोकने के पीछे क्या आधिकारिक कारण था?
4. क्या वन विभाग के छोटे कर्मचारियों के जरिए वसूली कराई जा रही है?
5. क्या रेंजर नितिन लहरे को इस कथित लेन-देन की जानकारी थी?
6. क्या विभाग फोनपे ट्रांजेक्शन और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराएगा?
अब देखना यह है कि वन विभाग के उच्चाधिकारी इस गंभीर शिकायत पर जांच कर कार्रवाई करते हैं या फिर मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

अवैध रेत का खेल या फोनपे से वसूली का नेटवर्क? बाबू भाई, यहां तो मामला कुछ और ही है!">








