
रतनपुर – छत्तीसगढ़ की प्राचीन राजधानी, पौराणिक नगरी रतनपुर… जहाँ सहस्त्राब्दियों से माँ महामाया अपने भक्तों पर कृपा बरसाती आई हैं। यह वही पावन शक्ति पीठ है, जहाँ आस्था की ज्योति कभी नहीं बुझी, जहाँ भक्तों की पुकार सीधे माँ के चरणों तक पहुँचती है।
मगर बीते वर्षों में, इस पावन धाम पर ऐसे बादल मंडराने लगे हैं, जो न केवल मंदिर की पवित्रता पर प्रश्नचिन्ह हैं, बल्कि रतनपुर की धार्मिक पहचान को भी कलंकित कर चुके हैं—कछुआ कांड जैसी शर्मनाक घटनाएं, मंदिर परिसर में जिहादी मानसिकता वाले लोगों को दुकानें आवंटित करना, और प्रसाद की शुद्धता तक पर सवाल उठना, श्रद्धालुओं के मन को व्यथित कर रहे हैं।
अब माँ महामाया मंदिर ट्रस्ट का चुनाव कल, 10 अगस्त को होने जा रहा है। दशकों से सत्ता की कुर्सी पर काबिज कुछ ट्रस्टी फिर से अपने पद बचाने की कोशिश में हैं। पर नगर के लोग, साधु-संत और हिंदूवादी संगठन इस बार बदलाव के लिए एकजुट होते दिख रहे हैं।
भक्तों का मानना है—
“जब-जब धर्म संकट में पड़ा, माँ ने अपने भक्तों को दिशा दी… अब समय है इस शक्ति पीठ को अपवित्र हाथों से मुक्त कराने का।”
स्थानीय जनमानस की उम्मीदें प्रदेश और स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं। यदि वे हस्तक्षेप करें, तो रतनपुर को भ्रष्टाचार और अपवित्रता की छाया से मुक्त कर मंदिर की गरिमा को पुनः स्थापित किया जा सकता है।
कल का दिन तय करेगा—
क्या माँ महामाया की नगरी में फिर से धर्म, आस्था और पवित्रता का सूरज चमकेगा?
या फिर यह पावन शक्ति पीठ, राजनीति और निजी स्वार्थ के अंधेरे में ही डूबी रहेगी?
रतनपुर अब साँस थामकर इस ऐतिहासिक चुनाव के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहा है…







