रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप साबित हुआ जिले के सबसे बड़े शिक्षा पद जिला शिक्षा अधिकारी डीईओ पर विराजमान है
बिलासपुर ज़िले के शिक्षा विभाग से निकलकर आई एक घटना ने पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार और पदोन्नति की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कोटा विकासखंड के पूर्व बीईओ विजय टांडे, जिन पर एक विधवा शिक्षिका से 1 लाख 34 हज़ार रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप साबित हुआ, अब जिले के सबसे बड़े शिक्षा पद – जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) – पर विराजमान हैं।
आरोप क्या हैं?
शिक्षिका नीलम भारद्वाज ने 7 मार्च 2025 को कलेक्टर बिलासपुर को लिखित शिकायत दी थी। उनका कहना था कि उनके पति, स्व. पुष्कर भारद्वाज (शिक्षक) की मृत्यु के बाद सेवा-निवृत्ति देयकों और लंबित वेतन-भत्तों के भुगतान के एवज में विजय टांडे ने भारी रिश्वत की मांग की।
जांच अधिकारियों ने रिपोर्ट में शिकायत को सही पाया और साफ लिखा कि टांडे ने सहायक ग्रेड-2 के माध्यम से बार-बार रकम की मांग की। यहां तक कि तय भुगतान से ₹1,48,610 की राशि भी रोक दी गई।
कार्रवाई क्या हुई?
आरोप साबित होने के बाद तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने विजय टांडे को बीईओ पद से हटा दिया था और विभागीय जांच की अनुशंसा की थी। यह मामला DPI (लोक शिक्षण संचालनालय) तक पहुंचा और 29 जुलाई 2025 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
नोटिस में साफ चेतावनी दी गई – 7 दिन में जवाब दें, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई होगी।
फिर भी कैसे बने DEO?
सबसे बड़ा सवाल यही है – जब एक अधिकारी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो चुके हैं और विभागीय जांच लंबित है, तो उसे और ऊँचे पद पर क्यों बैठाया गया?
क्या अब शिक्षा विभाग में यही “अघोषित नियम” बन गया है कि –
जितना बड़ा भ्रष्टाचार, उतना बड़ा इनाम”?
जनता में आक्रोश
शिक्षा जगत और आम लोगों में इस बात को लेकर रोष है कि जिस विभाग को बच्चों का भविष्य संवारना है, वहां ऐसे अधिकारी सबसे बड़े जिम्मेदार पद पर बैठे हैं।
लोग पूछ रहे हैं –
ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारियों की अनदेखी क्यों?
क्या भ्रष्टाचार अब योग्यता का पैमाना बन चुका है?
क्या इस तरह की नियुक्तियां बाकी अधिकारियों को भी गलत संदेश नहीं देंगी?
अब निगाहें DPI और सरकार पर
DPI ने भले ही नोटिस जारी कर जवाब मांगा हो, लेकिन अब देखना यह है कि क्या विभाग सच में इस मामले में कठोर कार्रवाई करेगा या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
प्रदेश में यह चर्चा आम हो चुकी है –
“यहां जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी होगा, उतना ही बड़ा पद पाएगा।”








