
खोंगसरा (बिलासपुर):—- बिलासपुर वन मंडल अंतर्गत सहायक वन परिक्षेत्र खोंगसरा में एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वन कार्यालय से लगभग 800 मीटर दूर रेलवे द्वारा बनाए गए पानी निकासी के गहरे गड्ढे में गिरने से लगभग 3 वर्ष की एक मादा हिरण की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि गड्ढे में गिरने के दौरान उसका पैर टूट गया, जिसके कारण वह बाहर नहीं निकल सकी और पानी में डूबने से उसकी मृत्यु हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद हिरण के शव को गहरे पानी से बाहर निकाला गया। पशु चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद रेंजर एवं वन विभाग की टीम ने पंचनामा तैयार कर अंतिम संस्कार की कार्रवाई पूरी की।
रेलवे का गड्ढा बना जानलेवा
जानकारी के अनुसार खोंगसरा क्षेत्र में रेलवे अंडरब्रिज में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या रहती थी। इसके समाधान के लिए रेलवे द्वारा अंडरब्रिज के समीप एक बड़ा और गहरा तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया, जहां पानी एकत्रित किया जाता है। लेकिन इस गड्ढे के चारों ओर न तो सुरक्षा घेराबंदी की गई है और न ही वन्यजीवों एवं मवेशियों की सुरक्षा के लिए कोई अन्य व्यवस्था की गई है।
वन क्षेत्र से लगे होने के कारण यहां हिरण, मवेशी और अन्य वन्यजीव अक्सर चारा और पानी की तलाश में पहुंच जाते हैं। ऐसे में खुले और गहरे गड्ढे उनके लिए मौत का कारण बन रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा लंबे समय से दुर्घटनाओं का कारण बना हुआ है।
पहले भी हो चुकी हैं कई मौतें
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार इसी गड्ढे में गिरने से पहले भी गाय, भैंस सहित 7 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। वहीं यदि पूरे सहायक वन परिक्षेत्र खोंगसरा की बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में 10 से अधिक हिरणों की मौत विभिन्न कारणों से हो चुकी है। इनमें रेलवे ट्रैक पर दुर्घटनाएं, खुले गड्ढों में गिरना, आवारा कुत्तों के हमले तथा अन्य मानवीय कारण शामिल हैं।
लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अपेक्षित स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ती जा रही है।
*हिरणों के लिए बेहद अनुकूल है यह क्षेत्र*
खोंगसरा, आमागोहन और टाटीधार का वन क्षेत्र हिरणों के प्राकृतिक रहवास और उनकी संख्या में वृद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। यहां पर्याप्त वन क्षेत्र, प्राकृतिक भोजन और अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है, जिसके कारण पिछले वर्षों में हिरणों की संख्या में वृद्धि भी देखी गई है।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों को विशेष संरक्षण प्रदान किया जाए और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं तो हिरणों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है। यह क्षेत्र भविष्य में हिरण संरक्षण के एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में विकसित हो सकता है।
हिरण जोन बनाने की मांग लगातार
सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा का कहना है कि खोंगसरा क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हिरणों की संख्या और बार-बार हो रही मौतों को देखते हुए लंबे समय से “हिरण जोन” या विशेष संरक्षण क्षेत्र घोषित करने की मांग की जा रही है। इस संबंध में सुशासन दिवस से लेकर वन मंत्री तक कई आवेदन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं।
हालांकि अब तक केवल कागजी कार्रवाई और प्रक्रियाओं की चर्चा ही सामने आई है। जमीनी स्तर पर संरक्षण के लिए कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके कारण वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थम नहीं पा रहा है।
समय रहते कार्रवाई होती तो बच सकती थीं कई जानें
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेलवे द्वारा बनाए गए इस गहरे गड्ढे की समय रहते घेराबंदी कर दी जाती और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था की जाती तो कई जानवरों की जान बचाई जा सकती थी। लगातार हादसों के बाद भी रेलवे द्वारा सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई है।
वन्यजीव प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रेलवे प्रशासन एवं वन विभाग से मांग की है कि ऐसे सभी खतरनाक स्थानों की तत्काल पहचान कर सुरक्षा घेराबंदी की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य वन्यजीव की जान न जाए।

फिर एक मादा हिरण की मौत? रेलवे द्वारा खोदे गए गड्ढे में डूबने से गई जान">








