धरमजयगढ़ से असलम खान की रिपोर्ट
धरमजयगढ़:–; सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से कराए जा रहे रिन्यूवेशन कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है और गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
जानकारी के अनुसार अस्पताल की दीवारों पर लगाए जा रहे टाइल्स को निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप टाइल एडहेसिव से लगाने के बजाय सामान्य सीमेंट से चिपकाए जाने का आरोप है। इससे टाइल्स की मजबूती और टिकाऊपन को लेकर आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं।
वहीं अस्पताल के वार्डों में मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त गुणवत्ता के टाइल्स लगाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन मौके पर अलग प्रकार के टाइल्स लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस पर आपत्ति जताते हुए बीएमओ ने ठेकेदार से बेहतर गुणवत्ता के टाइल्स लगाने को कहा। इस पर ठेकेदार ने तर्क दिया कि धरमजयगढ़ में आवश्यक टाइल्स उपलब्ध नहीं हैं और बाहर से मंगाने में 20 से 25 दिन का समय लगेगा, इसलिए फिलहाल उपलब्ध टाइल्स ही लगाए जा रहे हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या समय बचाने के लिए अस्पताल जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान में गुणवत्ता से समझौता किया जा सकता है? यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ तो भविष्य में इसके खराब होने की पूरी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस संबंध में जब बीएमओ से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि टाइल्स लगाने में किस सामग्री का उपयोग किया जाता है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही नया अस्पताल बनने वाला है।
बीएमओ के इस बयान के बाद यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि जब डीएमएफ मद से वर्तमान अस्पताल भवन के रिन्यूवेशन पर सरकारी राशि खर्च की जा रही है, तब निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
इधर पीडब्ल्यूडी के संबंधित इंजीनियर का कहना है कि ठेकेदार को गुणवत्ता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं तथा विभाग समय-समय पर निर्माण कार्य का निरीक्षण भी कर रहा है।
हालांकि निरीक्षण के बावजूद यदि निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन आरोपों की जांच कर निर्माण कार्य की वास्तविक गुणवत्ता का परीक्षण कराता है या नहीं। फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि डीएमएफ मद की राशि का सही उपयोग हो रहा है या फिर सरकारी पैसों की बर्बादी की जा रही है।

DMF मद से सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ में रिन्यूवेशन कार्य पर उठे सवाल, घटिया निर्माण का आरोप… सरकारी पैसों की बर्बादी या लापरवाही..जिम्मेदार कौन?">








