
बेटियों के सपनों को सम्मान दो, योजनाओं का लाभ समय पर दो।”
“साइकिल नहीं, यह बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा का अधिकार है।”
“योजनाएं फोटो से नहीं, समय पर लाभ मिलने से सफल होती हैं।”
मुख्य अतिथि के इंतजार में अटका वितरण, दूर-दराज़ की छात्राओं की बढ़ी मुश्किलें
साइकिलों की गुणवत्ता पर पालकों ने जताई चिंता, स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग
शाला विकास समिति का गठन भी अधूरा, कई प्रशासनिक कार्य प्रभावित
खोंगसरा (कोटा), बिलासपुर:—
“सरकार ने बेटियों के सपनों को पंख देने के लिए साइकिलें भेजीं, लेकिन वे आज भी स्कूल परिसर में खड़ी हैं… और बेटियां रोज़ धूल और कीचड़ भरी सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर हैं।”
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सरस्वती साइकिल योजना का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना तथा स्कूल छोड़ने की दर कम करना है। लेकिन बिलासपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला खोंगसरा में यही योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है।
विद्यालय में करीब डेढ़ माह पहले 45 छात्राओं के लिए नई साइकिलें पहुंच चुकी हैं, लेकिन आज तक उनका वितरण नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि जिन बेटियों के लिए यह योजना बनाई गई, वे आज भी रोज़ कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंच रही हैं, जबकि साइकिलें स्कूल परिसर में खड़ी-खड़ी धूल खा रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार वितरण कार्यक्रम मुख्य अतिथि की अनुपलब्धता के कारण लगातार टलता रहा। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ भी अब मुख्य अतिथि की उपलब्धता का मोहताज हो गया है?
गुणवत्ता पर भी उठने लगे सवाल
मामला केवल वितरण में देरी तक सीमित नहीं है।
विद्यालय में रखी साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों और अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है।
कुछ पालकों का कहना है कि पहली नजर में कुछ साइकिलों की फिटिंग और निर्माण गुणवत्ता अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि अभी तक इस संबंध में किसी तकनीकी एजेंसी द्वारा आधिकारिक जांच नहीं की गई है और न ही विभाग ने गुणवत्ता पर कोई आधिकारिक टिप्पणी की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार छात्राओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो उन्हें मजबूत, सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली साइकिलें मिलनी चाहिए।
एसडीएमसी का गठन अधूरा, कई कार्य प्रभावित
विद्यालय में शाला विकास समिति (एसडीएमसी) का नया गठन भी अब तक नहीं हो पाया है। समिति का गठन लंबित रहने से कई प्रशासनिक निर्णय और विकास कार्य प्रभावित बताए जा रहे हैं।
प्रभारी प्राचार्य ने क्या कहा
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य दुजलाल लहरे ने बताया कि शाला विकास समिति के गठन के लिए कई बार बैठक बुलाई गई, लेकिन पर्याप्त संख्या में पालकों की उपस्थिति नहीं होने के कारण समिति का गठन नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया जारी है।
साइकिल वितरण के संबंध में उनका कहना है कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्यक्रम आयोजित कर शीघ्र वितरण कराया जाएगा।

साइकिलें स्कूल में धूल खा रहीं… बेटियां रोज़ पैदल चल रहीं! डेढ़ माह बाद भी खोंगसरा स्कूल की 45 छात्राओं को नहीं मिला सरस्वती साइकिल योजना का लाभ, गुणवत्ता पर भी उठे सवाल">







