
रतनपुर….जमुनाही–तिलकडीह। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप शासकीय प्राथमिक शाला जमुनाही–तिलकडीह में पोला पर्व को स्थानीय कला, संस्कृति और जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ते हुए विशेष शैक्षणिक गतिविधि आयोजित की गई।इस अवसर पर गांव की मृदा शिल्प कला में दक्ष श्रीमती चंद्रवती पोर्ते, श्रीमती अहिल्या बाई पोर्ते एवं उनके साथियों ने विद्यालय पहुंचकर बच्चों को पोला पर्व की परंपराओं और मिट्टी से जुड़ी लोककला की जानकारी दी। बच्चों ने स्वयं मिट्टी से नांदी बैल, जतवा, दीया एवं चुकुलिया जैसी पारंपरिक वस्तुएं बनाना सीखा।
करके सीखने से बढ़ी बच्चों की रचनात्मकता
गतिविधि के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक मिट्टी को आकार देते हुए पारंपरिक कलाकृतियां तैयार कीं। इस करके सीखने की प्रक्रिया से बच्चों में रचनात्मकता, हस्तकौशल, कल्पनाशक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिला।साथ ही बच्चों को अपनी स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को करीब से समझने का अवसर भी मिला।
माटी और समुदाय से जुड़ी शिक्षा
विद्यालय के शिक्षक बलदाऊ सिंह श्याम ने कहा कि स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक कौशल को कक्षा तक पहुंचाना शिक्षा को अधिक जीवंत और उपयोगी बनाता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय ज्ञान को कक्षा तक पहुंचाना और शिक्षा को माटी व समुदाय से जोड़ना ही NEP 2020 की सार्थकता है।
पोला पर्व के माध्यम से आयोजित यह गतिविधि बच्चों के लिए केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रही, बल्कि लोककला, परंपरा और व्यावहारिक शिक्षा को एक साथ सीखने का प्रभावी माध्यम बनी।









