
बेलगहना- “ईद उल अज़हा” जिसे“ईद उज़ जुहा” भी कहते है मुसलमानों का एक प्रमुख त्योहार है जो पूरी दुनिया में इस्लामिक “जिल हज्जा” महीने की 10 तारीख़ को मनाया जाता है । इसी मुकद्दस महीने में खुशनसीब मुसलमान हज करने मुकद्दस मक्के शरीफ जाते है, साथ ही मदीने शरीफ अपने प्यारे आका नबी ए करीम मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की मुकद्दस बारगाह और मस्जिद ए नबवी में हाजिर होते है। तथा हज के अरकान पूरे करते हैं

आज सुबह 8:00 बजे ईदुल अजहा की नमाज बेलगहना स्थित ईदगाह में भाईचारा और शांतिपूर्ण माहौल में अदा की गई।
ईदुल अजहा की नमाज जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मुनव्वर अंसारी ने नमाज अदा कराई समाज के सैकड़ों लोगों ने खुशनुमा माहौल में जमात के साथ नमाज अदा की।और देश प्रदेश में अमन शांति की दुआ मांगी। इस मुबारक मौके पर सभी मुस्लिम भाइयों ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की बधाई दी।इस दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने स्थानीय पुलिस बल तैनात रहे।

जहीर जुनजानी स्थानीय मीडिया से बातचीत करते हुए बताया की,ईद का मायने “ख़ुशी” और “अज़हा” का मायने “चाश्त” के वक्त से है I इस दिन चाश्त के वक्त मुसलमान ईद उल अजहा की नमाज़ अदा करते है और इस्माइल अलैही सलाम की बेटे की कुर्बानी अल्लाह की बारगाह में की थी इसीलिए आज लोग जानवर की कुर्बानी देते हैं जो लोग साहिबे निसाब है वे जानवर की कुर्बानी भी करते है।
“जुहा” के खास मायने ही है “त्याग या क़ुरबानी” के, जो प्रतीक है इस बात का की कोई चीज़ जो हमें दुनिया में सबसे ज्यादा अज़ीज़ और प्यारी हो उसे भी हमें अल्लाह के हुक्म से भलाई की राह में कुरबान करने से पीछे नहीं हटना चाहिए I

*क़ुरबानी लफ्ज़ “क़ुर्ब” से बना है जिसका मतलब होता है अल्लाह के क़रीब होना । अपने रब की इबादत तकवा और परहेज़गार के ज़रिए बंदा अपने रब के क़रीब पहुंच सकता।









