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मैनपाट: ग्राम पंचायत पेंट में भ्रष्टाचार का ‘महाघोटाला’, 15वें वित्त की राशि सहित भवन मरम्मत, ढोढ़ी और कचरा पेटी का पैसा डकार गए जिम्मेदार

सीतापुर से तौफ़ीक़ अहमद खान की रिपोर्ट

​मैनपाट/सरगुजा :— जिले के सुप्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र मैनपाट के जनपद अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पेंट से भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। विकास कार्यों के नाम पर स्वीकृत लाखों रुपए की शासकीय राशि को धरातल पर काम कराए बिना ही फर्जी तरीके से आहरण (विड्रॉल) कर ‘अधिकारी-जनप्रतिनिधि’ गठजोड़ द्वारा आपस में बांटकर खा लिया गया है।
​कागजों पर विकास दिखाकर सरकारी खजाने में डाका डालने के इस खेल से अब ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
​इन चार बड़े कार्यों में हुआ ‘कागजी विकास’ और लाखों का गबन:
​ग्रामीणों से मिली जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और उसके बाद पंचायत में बिना कोई काम कराए मोटी रकम निकाल ली गई:
​15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग: ग्राम पंचायत के विकास के लिए आए 15वें वित्त आयोग (15th के फंड में भारी हेराफेरी की गई है। इस राशि को नियम-कायदों को ताक पर रखकर ठिकाने लगा दिया गया।
​भवन मरम्मत में फर्जीवाड़ा: पंचायत के अंतर्गत शासकीय भवन की मरम्मत और जीर्णोद्धार के नाम पर मोटी रकम स्वीकृत कराई गई थी। पैसे तो निकाल लिए गए, लेकिन भवन आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
​ढोढ़ी मरम्मत (पारंपरिक जल स्रोत) का पैसा साफ: ग्रामीणों के निस्तारी और पीने के पानी के मुख्य स्रोत ‘ढोढ़ी’ की मरम्मत के नाम पर भी राशि आहरित कर ली गई, जबकि मौके पर फूटी कौड़ी का काम नहीं हुआ है।
​कचरा पेटी (डस्टबिन) निर्माण में घोटाला: गांव को स्वच्छ भारत मिशन के तहत सुंदर बनाने के लिए कचरा पेटी निर्माण का पैसा भी कागजों में खर्च दिखाकर हजम कर लिया गया। पूरे गांव में कहीं भी नई कचरा पेटी अस्तित्व में नहीं है।
​बिना ‘भौतिक सत्यापन’ के कैसे पास हो गए बिल?
​इस पूरे मामले में जनपद पंचायत मैनपाट के तकनीकी अमले और उप-अभियंता की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमतः किसी भी कार्य का पैसा तब निकलता है जब इंजीनियर मौके पर जाकर कार्य का ‘भौतिक सत्यापन’ करता है और मूल्यांकन करता है। जब धरातल पर कोई काम हुआ ही नहीं, तो आखिर किस आधार पर मूल्यांकन करके राशि का भुगतान कर दिया गया? यह सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
​आक्रोशित पैसा, जो गांव की सड़क, पानी, सफाई और भवनों के लिए आता है, उसे सरपंच-सचिव और अधिकारी मिलकर खा गए। गांव में ढोढ़ी वैसी ही टूटी पड़ी है, भवन जर्जर हैं, पानी की समस्या जस की तस है। हम चुप बैठने वाले नहीं हैं, इस महाघोटाले की शिकायत जिला कलेक्टर से की जाएगी।”
​उच्च स्तरीय जांच की मग
​मैनपाट जनपद के ग्राम पंचायत पेंट का यह मामला एक बड़े वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, और दोषी सरपंच, सचिव व इंजीनियर कोई भी हो उसके खिलाफ शासकीय धन के गबन का मामला उनसे राशि की रिकवरी की जाए।
​अब देखना होगा कि इस बड़े खुलासे के बाद जिला प्रशासन और जनपद पंचायत मैनपाट के आला अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर इस फाइल को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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