
FIR के करीब एक साल सात माह बाद कार्रवाई, पुराने राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजों पर कोर्ट की नजर ,अग्रिम जमानत मंजूर
राजू यादव बोले—“आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नहीं… अंततः जीत सच्चाई की ही होती है”
घरघोड़ा/धरमजयगढ़:— ग्राम अमलीटिकरा की विवादित भूमि की खरीदी-बिक्री को लेकर दर्ज आपराधिक मामले में आरोपी राजू कुमार यादव को अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा से बड़ी राहत मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने मामले की केस डायरी, राजस्व अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों के परीक्षण के बाद राजू यादव की प्रथम अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
यह मामला आरक्षी केन्द्र धरमजयगढ़ के अपराध क्रमांक 267/2026 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
शासकीय भूमि को निजी नाम पर दर्ज कराने का आरोप
अभियोजन के अनुसार ग्राम अमलीटिकरा स्थित खसरा नंबर 334, 348/2, 349/2, 355/2 एवं 357/2, कुल रकबा 1.312 हेक्टेयर, को दखल रहित एवं अकृषि योग्य शासकीय भूमि बताया गया है। आरोप है कि उक्त भूमि को बिना वैध प्राधिकार एवं वैधानिक अनुमति के फूलेश्वरी पति मानिकदास के नाम राजस्व अभिलेख में भूमिस्वामी हक में दर्ज किया गया और बाद में 17 जनवरी 2025 को पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिए राजू कुमार यादव ने इसे खरीदा।
इसी मामले में राजस्व विभाग की ओर से कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना धरमजयगढ़ में FIR दर्ज कराई गई।
बचाव पक्ष ने पेश किए 1930 और 1954-55 के रिकॉर्ड
राजू यादव की ओर से अधिवक्ता सुशील शुक्ला ने न्यायालय के समक्ष कई दस्तावेज पेश करते हुए तर्क दिया कि संबंधित भूमि का इतिहास अभियोजन के दावे से अलग है। बचाव पक्ष के अनुसार वर्ष 1930 के मिशल तथा वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में भूमि निजी खातेदारों के नाम दर्ज रही है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि राजू यादव ने राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद पंजीकृत दस्तावेज के माध्यम से भूमि खरीदी थी। विक्रय के समय तक भूमि विक्रेता फूलेश्वरी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी तथा विक्रय के बाद नामांतरण की कार्रवाई भी की गई थी।
डेढ़ साल बाद FIR, कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण तथ्य
न्यायालय के आदेश में यह तथ्य विशेष रूप से दर्ज है कि 17 जनवरी 2025 को विक्रय पत्र निष्पादित होने के लगभग एक वर्ष सात माह बाद 24 अगस्त 2026 को FIR दर्ज कराई गई।
अदालत ने यह भी पाया कि केस डायरी में संलग्न दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2001-02 से संबंधित भूमि फूलेश्वरी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज दिखाई देती है। वहीं बचाव पक्ष के दस्तावेजों में पुराने रिकॉर्ड में निजी खातेदारों के नाम भूमि दर्ज होने का उल्लेख है।
कोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले ही दी राहत
अपर सत्र न्यायालय ने मामले की प्रकृति, उपलब्ध दस्तावेजों, आरोपी के स्थानीय निवासी होने तथा अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित माना।
अदालत ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में राजू यादव को ₹50 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा ₹25-25 हजार के दो सक्षम जमानतदारों की शर्त पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।
“आरोप बेबुनियाद हैं, सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नहीं”
अग्रिम जमानत मिलने के बाद राजू कुमार यादव ने मीडिया के माध्यम से अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी गलत मंशा से भूमि नहीं खरीदी और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों के विपरीत हैं। राजू यादव ने कहा—
“मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। मैंने पूरी प्रक्रिया के तहत भूमि खरीदी है। सत्य परेशान हो सकता है, किंतु पराजित नहीं। अंततः जीत सच्चाई की ही होती है और आगे भी मेरी जीत जारी रहेगी।”
अग्रिम जमानत मिलने से राजू यादव को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।

शासकीय जमीन के ‘खेल’ के आरोप में घिरे राजू यादव को कोर्ट से बड़ी राहत">







