
बिलासपुर :—खेतों की मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर जिले में 22 अक्टूबर से ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह अभियान 30 नवंबर तक चलेगा। इसके तहत किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
अभियान के अंतर्गत जिले के बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा विकासखंड में कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रत्येक विकासखंड की 25 ग्राम पंचायतों में शिविर लगाए जाएंगे। इस तरह जिले की कुल 100 ग्राम पंचायतों तक खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारी पहुंचाई जाएगी। प्रत्येक कार्यक्रम में लगभग 50 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।
उप संचालक कृषि ने संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिक से अधिक किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, महिला कृषक स्व-सहायता समूहों, कृषि उत्पादक संगठनों, कृषि सखियों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा।
अभियान के दौरान किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार खाद और उर्वरकों का उपयोग करने की जानकारी दी जाएगी। मृदा परीक्षण के महत्व के साथ जल संरक्षण, जल संचयन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने वाली टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर जोर दिया जाएगा।
धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों का बेहतर उपयोग करने के लिए किसानों को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान और उनके उचित प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी जाएगी।
अभियान में जैविक एवं जीवांश उत्पादों के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों और खेतों में प्रदर्शन के माध्यम से प्राकृतिक खेती की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी। इसका उद्देश्य मिट्टी की सेहत बनाए रखने के साथ कृषि भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक बरकरार रखना है।









