
कवियों की रचनाओं में बही संस्कृति, संवेदना और समाज की सरिता, श्रोताओं ने किया भावनाओं का आत्मसात
रतनपुर:—
छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में रविवार को महान साहित्यकार एवं इतिहासविद् बाबू प्यारेलाल गुप्त जी की 134वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य आंचलिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। बाबू प्यारेलाल गुप्त सृजन पीठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बिलासपुर, कोटा, जयराम नगर, कोटमी सुनार सहित विभिन्न क्षेत्रों से पधारे नामचीन और नवोदित कवियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में जहां भादो की सूखी शाम थी, वहीं मंच पर कविता, गीत, ग़ज़ल और छत्तीसगढ़ी रचनाओं की भावनात्मक बारिश ने समूचे सभागार को रसविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, गणमान्य नागरिक एवं विद्वतजनों की उपस्थिति रही। कवियों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, संवेदना और सामाजिक यथार्थ की गूंज स्पष्ट सुनाई दी।सम्मेलन की शुरुआत बिलासपुर की मशहूर कवियत्री पूर्णिमा तिवारी के मधुर गीतों और ग़ज़लों से हुई। उनकी आवाज़ और शब्दों ने जैसे श्रोताओं के मन को छू लिया और शुरुआत से ही सभागार में साहित्यिक ऊर्जाओं का संचार हो गया। इसके बाद मंच पर आए कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर समां बांध दिया।बिलासपुर के वरिष्ठ कवि जगतारन डहरे, श्रीकृष्ण भावधारा के प्रसिद्ध गीतकार व गायक मदन सिंह ठाकुर, वरिष्ठ रचनाकार विजय कुमार गुप्ता, छत्तीसगढ़ी के समर्थ कवि व गायक दशरथ मतवाले (जयराम नगर), व्यास सिंह ‘गुमसुम’ (कोटमी सुनार), प्रतिभाशाली युवा विपुल तिवारी (बिलासपुर), कोटा की संवेदनशील कवियत्री ज्योति श्रीवास, मशहूर गीतकार गया प्रसाद साहू ‘रतनपुरिहा’, “सुनहरा आसमान” के रचयिता चंद्र प्रकाश साहू, मरहीकापा कोटा के युवा हस्ताक्षर मोहित साहू, रतनपुर के वरिष्ठ कवि काशीराम साहू, स्वामी विवेकानंद भावधारा के सशक्त गीतकार डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा ‘दीपक’, और रामानंद यादव, रामरतन भारद्वाज, दिनेश पांडेय, रामेश्वर सिंह शांडिल्य, प्रमोद कश्यप, ब्रजेश श्रीवास्तव आदि ने अपनी प्रस्तुति से कविता को जन-जन से जोड़ दिया।
मंच संचालन ने बढ़ाई गरिमा
इस सुंदर साहित्यिक कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन कोटा की सुप्रसिद्ध कवियत्री ज्योति श्रीवास ने किया। उन्होंने मंच को न केवल सधी हुई भाषा और सरस शैली से संजोया, बल्कि हर रचनाकार को आदर सहित प्रस्तुत किया। उनका संचालन कार्यक्रम की आत्मा बन गया।
विद्वतजनों की उपस्थिति ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. रमेन्द्र मिश्र तथा वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता डॉ. जी. एल. रायकवार मौजूद रहे। इनके अलावा वरिष्ठ शिक्षाविद् शंकर लाल पटेल, सरस्वती शिशु मंदिर के व्यवस्थापक डॉ. सुनील जायसवाल, प्राचार्य मुकेश श्रीवास्तव, लेखिका श्रीमती अनुसुईया गुप्ता, शिक्षाविद अनिल शर्मा, बलराम पांडेय, राकेश निर्मलकर, भानुप्रताप कश्यप, लक्ष्मी प्रसाद कश्यप, सर्वज्ञ श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
आभार और साहित्य की शपथ
कार्यक्रम का समापन बाबू प्यारेलाल गुप्त सृजन पीठ के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा ‘दीपक’ द्वारा व्यक्त आभार ज्ञापन से हुआ। उन्होंने कहा:——
बाबूजी न केवल एक इतिहासकार थे, बल्कि वे छत्तीसगढ़ी आत्मा के चिरंजीव रचनाकार भी थे। उनकी स्मृति में यह आयोजन सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि साहित्य को जीवित रखने की प्रतिज्ञा है।”







