
*गरियाबंद*:-जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सतत निगरानी एवं त्वरित सूचना व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिले के समस्त कोटवारों की ड्यूटी उनके-अपने ग्रामों में तत्काल प्रभाव से लगाई है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 24 एवं 34 के तहत जारी आदेश में कोटवारों को बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक कोटवार को अपने-अपने ग्राम की नदी, नाला एवं पुल-पुलियों के जलस्तर पर सतत निगरानी रखनी होगी। जलस्तर अथवा बाढ़ की स्थिति में किसी भी प्रकार के बदलाव की जानकारी तत्काल संबंधित हल्का पटवारी एवं ग्राम सचिव को देना होगा। इसके साथ ही हर दो घंटे में स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों की सूची होगी तैयार –
कोटवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित अथवा जलभराव से प्रभावित परिवारों की जानकारी एकत्र कर सूची तैयार करने और उसे संबंधित तहसील के नियंत्रण कक्ष में भेजने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे प्रभावित परिवारों की स्थिति पर नजर रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को तेजी से संचालित करने में मदद मिलेगी। बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए कोटवारों को गांवों में मुनादी के माध्यम से ग्रामीणों को नदी किनारे नहीं जाने की चेतावनी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विशेष रूप से तेज बहाव वाले क्षेत्रों एवं जलभराव वाले स्थानों पर लोगों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जाएगा। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी-नालों के बढ़े जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए अनावश्यक रूप से जल स्रोतों के आसपास न जाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों एवं सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही अथवा अनुपस्थित पाए जाने पर छत्तीसगढ़ कोटवारी नियम, 1999 के तहत सेवा समाप्ति अथवा अर्थदंड संबंधी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभावशील रहेगा और आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगा।









