
गौमाता केवल आस्था नहीं, हमारी जिम्मेदारी भी है।”
बेलगहना (बिलासपुर) :—बेलगहना के समीप ग्राम मझवानी में मुख्य सड़क पर एक मृत गाय कई घंटों तक पड़ी रहने की सूचना ने स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और पीड़ा पैदा कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग और प्रशासन को सूचना देने के बावजूद लंबे समय तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस गौवंश को भारतीय संस्कृति में मां का दर्जा दिया जाता है, उसी गौमाता का शव सड़क पर पड़े रहना व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करता है। सड़क से गुजरने वाले राहगीरों को दुर्गंध और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, वहीं स्वास्थ्य संबंधी खतरे की आशंका भी बढ़ गई है।
इस मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता सचिन नेहा साहू ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक मृत गाय का मामला नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की परीक्षा है। उन्होंने कहा कि यदि गौरक्षा केवल भाषणों और नारों तक सीमित रह जाए और जरूरत के समय गौवंश को सम्मानजनक अंतिम संस्कार तक न मिल सके, तो यह बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति है।
सचिन नेहा साहू ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके पर पहुंचकर मृत गाय का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया जाए तथा यह पता लगाया जाए कि सूचना मिलने के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों हुई। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी संवेदनहीन घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन से अपील की है कि गौवंश से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि गौसेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है।
“गौमाता का सम्मान, हर जिम्मेदार का पहला अभियान।”
“गौरक्षा केवल नारा नहीं, समय पर सेवा ही सच्ची श्रद्धा है।”
“जो गौमाता का सम्मान करेगा, वही समाज का मान बढ़ाएगा।”
“संवेदनशील प्रशासन ही सच्ची गौरक्षा की पहचान है।”
“गौमाता सड़क पर नहीं, सम्मान के साथ अंतिम विदाई की हकदार है।”








