
21वीं सदी के भारत की बात, फिर भी गांवों में मच्छर से मुकाबला… सवाल—आखिर कब होगा मलेरिया मुक्त गांव?
कोटा/कुरदर।
देश चांद पर पहुंचने और आधुनिक भारत की तस्वीर बदलने का सपना देख रहा है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में मलेरिया जैसी बीमारी आज भी लोगों की जिंदगी के सामने चुनौती बनकर खड़ी है। कुरदर क्षेत्र के आश्रित ग्राम चुनाखोदरा में मलेरिया जांच के दौरान दो मरीज पॉजिटिव पाए गए। इसकी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ और मरीजों को तत्काल बेहतर उपचार के लिए सिम्स अस्पताल भेजा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) निखलेश गुप्ता ने तत्काल स्वास्थ्य अमले को सक्रिय किया। मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ क्षेत्र में निगरानी और जांच बढ़ाई गई है।
पॉजिटिव मिलते ही सिम्स रेफर, स्वास्थ्य अमला गांव में पहुंचा
मरीजों को सिविल भर्ती/उपचार के लिए भेजने में कमलेश पटेल, एएनएम कामिनी साहू और मितानिन समरीन बाई बैग सहित स्वास्थ्य अमले का सहयोग रहा। विभाग द्वारा मरीजों की स्थिति पर नजर रखने के साथ आसपास के क्षेत्र में भी सतर्कता बढ़ाई जा रही है।
बीएमओ निखलेश गुप्ता लगातार क्षेत्र का सघन निरीक्षण कर रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मचारियों को ग्रामीणों की जांच, मलेरिया की पहचान, उपचार और बचाव के उपायों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
बीमारी के खिलाफ अब गांव-गांव निगरानी जरूरी
चुनाखोदरा में पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी मलेरिया की जांच तेज करना जरूरी हो गया है। मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करने, साफ-सफाई, दवा छिड़काव और ग्रामीणों को मच्छरदानी के उपयोग के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाना चाहिए।
मार्मिक सवाल—विकास की रोशनी गांव के आखिरी घर तक कब?
देश आधुनिक तकनीक और विकास की ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। चांद तक पहुंचने की उपलब्धियां हासिल की जा रही हैं, लेकिन दूसरी ओर किसी दूरस्थ गांव में एक परिवार आज भी मलेरिया के डर के बीच जीने को मजबूर है।
चुनाखोदरा के दो पॉजिटिव मरीज सिर्फ दो आंकड़े नहीं हैं। वे उस हकीकत की तस्वीर हैं, जो पूछती है—विकास की दौड़ में गांवों को मलेरिया जैसी बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित कब किया जाएगा?
बीएमओ की तत्परता से मरीजों को समय पर उपचार के लिए भेजा जाना राहत की बात है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए लगातार जांच, मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई, दवा छिड़काव और जनजागरूकता अभियान जरूरी हैं।
■ स्लोगन
“चांद तक पहुंच गया भारत, अब गांवों से मलेरिया हटाना है…
हर घर सुरक्षित हो, यही असली विकास कहलाना है।”
■ एक और मार्मिक संदेश
“विकास की ऊंची उड़ान तभी पूरी होगी,
जब गांव की हर मां अपने बच्चे को मलेरिया के डर से बेखौफ सुला सकेगी।”
■ स्वास्थ्य विभाग की अपील
बुखार को हल्के में न लें। मलेरिया की आशंका होने पर तत्काल जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लें।
जानकारी
क्षेत्र
कुरदर
गांव
आश्रित ग्राम चुनाखोदरा
मलेरिया पॉजिटिव
2 मरीज
उपचार
सिम्स अस्पताल भेजा गया
स्वास्थ्य अधिकारी
बीएमओ निखलेश गुप्ता
निगरानी
क्षेत्र में सघन निरीक्षण
सहयोग
कमलेश पटेल, एएनएम कामिनी साहू, मितानिन समरीन बाई बैग
जांच, उपचार, मच्छर नियंत्रण और जागरूकता
“दो पॉजिटिव के बाद अब आसपास के गांवों पर नजर”
चुनाखोदरा में मलेरिया पॉजिटिव मिलने के बाद आसपास के गांवों में भी स्वास्थ्य विभाग को जांच और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। ग्रामीणों से अपील है कि लगातार बुखार, ठंड लगना या कंपकंपी जैसे लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।








