
RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित खबरों के बाद बढ़ा विवाद, पत्रकारों का आरोप— शिकायतों के जरिए खोजी पत्रकारिता पर दबाव बनाने की कोशिश।
अब कानूनी लड़ाई के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी।
बिलासपुर
कोटा विकासखंड के शासकीय विद्यालयों और संकुल केंद्रों में सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित समाचारों ने अब नया मोड़ ले लिया है। कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद 45 शिक्षकों और 2 संकुल समन्वयकों द्वारा पत्रकारों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पत्रकारों का कहना है कि उन्होंने केवल RTI के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तथ्यात्मक समाचार प्रकाशित किए। उनका आरोप है कि शिकायतें खोजी पत्रकारिता को हतोत्साहित करने और मानसिक दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई हैं।
इसी बीच पत्रकारों ने भी कानूनी कार्रवाई का निर्णय लेते हुए संबंधित शिकायतकर्ताओं के विरुद्ध हाईकोर्ट में मानहानि का दावा एवं परिवाद दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यदि किसी समाचार पर आपत्ति थी तो उसका उत्तर तथ्यों के साथ दिया जाना चाहिए था, न कि पुलिस शिकायतों के माध्यम से पत्रकारों की साख को प्रभावित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
मामले ने शिक्षा विभाग और पत्रकारिता जगत में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें न्यायालय की आगामी कार्रवाई और प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों पर टिकी हैं
🔹 RTI के जरिए स्कूलों से जुड़े दस्तावेज प्राप्त हुए।
🔹 दस्तावेजों के आधार पर कथित अनियमितताओं संबंधी समाचार प्रकाशित हुए।
🔹 45 शिक्षक और 2 संकुल समन्वयकों ने पत्रकारों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
🔹 पत्रकारों ने शिकायतों को दबाव बनाने का प्रयास बताते हुए हाईकोर्ट में मानहानि का दावा करने का फैसला लिया।
🔹 अब मामले की अगली दिशा न्यायालय की प्रक्रिया तय करेगी।
📦 क्या कहते हैं पत्रकार?
“हमने केवल RTI से प्राप्त दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर समाचार प्रकाशित किए हैं। यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो उसका जवाब तथ्यों और कानून के दायरे में दिया जाना चाहिए।”







