
*गरियाबंद*:- जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र और जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले शिक्षाकर्मियों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने जा रहा है। कलेक्टर बी.एस. उइके ने इस गंभीर मामले को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए मैनपुर जनपद पंचायत में वर्ष 2005 से 2007 के बीच हुई शिक्षाकर्मी नियुक्तियों की विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए हैं।

मंगलवार को जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक के दौरान कलेक्टर ने सीपीग्राम्स (पीजी पोर्टल) के लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए कहा कि जिन शिक्षाकर्मियों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र अथवा अन्य जाली दस्तावेजों के माध्यम से नौकरी प्राप्त की है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि उक्त अवधि में नियुक्त सभी शिक्षाकर्मियों की सूची दो दिवस के भीतर उपलब्ध कराई जाए, ताकि जांच प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी शिक्षक द्वारा फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर नियुक्ति प्राप्त करना प्रमाणित होता है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में सेवा समाप्ति, वेतन वसूली तथा अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जनदर्शन, जनशिकायत, मुख्यमंत्री प्रवास तथा सीपीग्राम्स के प्रकरणों की राज्य स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग होती है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी लंबित मामलों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
इसके अलावा कलेक्टर ने स्कूल जतन योजना के तहत वित्तीय अनियमितताओं और राशि के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की भी जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासकीय योजनाओं में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में अपर कलेक्टर पंकज डाहिरे, अपर कलेक्टर ऋषा ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षाकर्मियों पर कसेगा शिकंजा, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश">







