
रतनपुर :—
कोटा विकासखंड के संकुल केंद्र जोगीपुर में सरकारी राशि के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिक्षा और संकुल संचालन के नाम पर सरकार से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किस तरह व्यक्तिगत फायदे और मनमानी के लिए हो रहा है, इसका खुलासा एक लिखित शिकायत में हुआ है।संकुल समन्वयक रामकुमार मरावी पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक संकुल मद की राशि को मनमाने तरीके से खर्च कर फर्जी बिलों के जरिए लाखों का गबन किया है। यह शिकायत प्रमोद कुमार यादव द्वारा जिला कलेक्टर को सौंपी गई है।
चाय की चुस्की और पेन की स्याही में डूबा घोटाला
शिकायत के अनुसार, 26 मार्च 2024 को सुशील होटल जोगीपुर के नाम से एक बिल पेश किया गया, जिसमें 88 लोगों के लिए 15-15 रुपए की दर से चाय की खरीद दर्शाई गई। जब होटल संचालक से इस संबंध में जानकारी ली गई, तो उसने स्पष्ट किया कि होटल में सिर्फ 10 रुपए की चाय मिलती है, और स्टेशनरी या वाहन सुविधा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।बिल में 1500 रुपए का ऑटो रिक्शा किराया, 6 रजिस्टर के लिए 1200 रुपए और पेन के लिए 180 रुपए भी जोड़े गए — यानी छोटी-छोटी वस्तुओं की ओवर रेटिंग कर सरकारी पैसे की जेब भराई।
स्टेपलर 2160 का और पेन 4200 के?
25 मार्च 2025 को द्रोपदी जनरल स्टोर, जोगीपुर के नाम से जारी बिल और भी चौंकाने वाला है। बिना किसी मात्रा और दर के 2160 रुपए का स्टेपलर, 4200 रुपए के पेन और 1200 रुपए के ‘सुजा’ की खरीद दर्शाई गई। इसी दिन “जय महामाया किराना एंड जनरल स्टोर” लारीपारा के नाम से एक और बिल लगाया गया, जिसमें घरेलू उपयोग की वस्तुएं — जैसे तेल, हल्दी, बेसन, मिर्च, बिस्किट, साबुन, अगरबत्ती, आटा, प्याज, आलू और शक्कर — खरीदने का हवाला देकर लगभग 9 हजार रुपए खर्च दिखाए गए।
घोटाले की गंध, बिलों में फर्जी हस्ताक्षर
शिकायतकर्ता का दावा है कि इन बिलों पर संबंधित दुकानदारों के फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान प्राप्त किया गया है। यह भी कहा गया कि संकुल समन्वयक ने कई अन्य बिलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं की हैं, जिनकी जांच की जानी चाहिए। सवाल उठता है — क्या संकुल केंद्र में आटा, मिर्ची, निरमा और साबुन की जरूरत होती है?अगर नहीं, तो फिर शिक्षा विभाग की राशि का ये उपभोग आखिर किसके लिए?
शिकायत कर्ता ने -प्रसासन से की अपील——
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि शिक्षा की राशि में हो रहे इस संगठित भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।









