
बहेरामुड़ा संकुल में सेवानिवृत्त हुए विजय गुप्ता का भावभीना सम्मान;
नम आंखों से बोले— “ये 40 वर्ष मेरे जीवन की सबसे अमूल्य पूंजी हैं”
बेलगहना। शासकीय सेवा का सफर केवल नौकरी तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह समाज, विद्यार्थियों और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण की एक लंबी साधना होती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायी यात्रा का भावुक पड़ाव उस समय आया, जब शासकीय सेवा के 40 वर्ष पूर्ण करने के बाद बहेरामुड़ा संकुल में विजय गुप्ता को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
समारोह में उपस्थित शिक्षकों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उनका अभिनंदन किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सम्मान, अपनापन और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला कि कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
सम्मान समारोह में विजय गुप्ता के चार दशक लंबे सेवाकाल को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में ईमानदारी, अनुशासन, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने न केवल शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन किया, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक मूल्यों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके व्यवहार और कार्यशैली ने हमेशा सहकर्मियों और विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
अपने संबोधन के दौरान विजय गुप्ता भावुक हो उठे। गला भर आया और नम आंखों से उन्होंने कहा, “आज मैं शासकीय सेवा से भले ही सेवानिवृत्त हो रहा हूं, लेकिन इस परिवार से मेरा रिश्ता कभी समाप्त नहीं होगा। ये 40 वर्ष मेरे जीवन के सबसे अमूल्य दिन रहे हैं। मुझे जो सम्मान, स्नेह और सहयोग मिला, वही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। यदि जीवन में मुझसे किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं क्षमा चाहता हूं और सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।” उनके इन शब्दों ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया।

समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि विजय गुप्ता ने अपने कार्यकाल में कभी भी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धैर्य, ईमानदारी और सकारात्मक सोच के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा
और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
इस अवसर पर उन्हें शॉल, श्रीफल, स्मृति-चिह्न, पुष्पगुच्छ और सम्मान-पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया
। सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए वर्षों की यादें साझा कीं और उनके सरल, सहज एवं मिलनसार व्यक्तित्व की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम में कई बार ऐसा भावुक माहौल बना जब वर्षों तक साथ काम करने वाले साथी अपने आंसू नहीं रोक सके।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने विजय गुप्ता के स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि सरकारी सेवा से उनकी औपचारिक जिम्मेदारियां भले समाप्त हो गई हों, लेकिन समाज और शिक्षा के प्रति उनका अनुभव और मार्गदर्शन आने वाले समय में भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत बना रहेगा।

वर्षों की सेवा का स्वर्णिम सफर हुआ पूर्ण, विदाई की बेला में छलक पड़े जज़्बात">








